सहकार भारती बिहार

बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार

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सहकार भारती बिहार

सहकारिता के क्षेत्र में सहकार भारती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रेरित एक प्रमुख आनुषांगिक एवं पंजीकृत सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1978 में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर पुणे में हुई तथा 11 जनवरी 1979 से इसका विधिवत कार्य प्रारम्भ हुआ। सहकार भारती का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को जनकल्याण, सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाना है। संगठन “बिना संस्कार नहीं सहकार और बिना सहकार नहीं उद्धार” के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए उत्पादक, वितरक एवं उपभोक्ता के बीच समन्वय स्थापित कर सहकारिता आधारित आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्यरत है।


सहकार भारती के संस्थापक प्रेरणास्रोतों में स्व. माधवराव गोडबोले एवं संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं लक्ष्मणराव इनामदार (‘वकील साहब’) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संगठन ने प्रारम्भ से ही ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था, स्वदेशी चिंतन, सहकारिता संस्कार एवं सामूहिक विकास को केंद्र में रखकर कार्य किया है।


बिहार में सहकार भारती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, किसानों, युवाओं, महिला समूहों एवं ग्रामीण उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा सहकारिता की भावना को गाँव-गाँव तक पहुँचाने हेतु सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। संगठन प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), दुग्ध, मत्स्य, कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs), बुनकर सहकारिताओं एवं विभिन्न ग्रामीण सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।


सहकार भारती बिहार द्वारा सहकारिता जागरूकता अभियान, ग्राम स्तरीय बैठकें, किसान सम्मेलन, नेतृत्व विकास प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल आधुनिकीकरण, ग्रामीण उद्यमिता एवं कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। संगठन PACS के आधुनिकीकरण, डिजिटल बहीखाता, ERP प्रणाली, सहकारी प्रबंधन प्रशिक्षण एवं NABARD तथा NCDC जैसी संस्थाओं के साथ समन्वय के माध्यम से सहकारी संस्थाओं को आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।


महिला सशक्तिकरण एवं युवा नेतृत्व विकास सहकार भारती बिहार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। संस्था महिला सहकारी समितियों, SHG आधारित उद्यमों, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, डेयरी एवं ग्रामीण स्टार्टअप आधारित सहकारी मॉडल को प्रोत्साहित कर रही है। साथ ही किसानों एवं ग्रामीण उत्पादकों को बाजार, तकनीक, प्रशिक्षण एवं मूल्य संवर्धन से जोड़कर आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है।


सहकार भारती वर्तमान में भारत की सहकारिता व्यवस्था को ग्राम स्तर से लेकर जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत बनाने हेतु विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।


इसकी वर्तमान गतिविधियाँ मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों पर केंद्रित हैं:

सहकार भारती की प्रमुख वर्तमान गतिविधियाँ

सहकार भारती वर्तमान समय में देशभर में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक, आर्थिक एवं संगठनात्मक गतिविधियाँ संचालित कर रही है। संस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाना तथा “सहकार से समृद्धि” के विचार को जन-जन तक पहुँचाना है। इसके अंतर्गत सहकारिता जागरूकता अभियान, ग्राम स्तरीय बैठकें, किसान जागरण कार्यक्रम, सहकारिता सम्मेलन तथा सदस्यता अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, ग्रामीण युवाओं तथा सहकारी संस्थाओं को संगठित कर सहकारिता के महत्व के प्रति जागरूक किया जाता है।


वर्तमान में सहकार भारती का विशेष ध्यान प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), बहुउद्देशीय PACS तथा ग्रामीण सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। संस्था इन समितियों को सुशासन, संचालन सुधार तथा व्यवसायिक गतिविधियों में विविधीकरण के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान कर रही है। इसके साथ ही डिजिटल परिवर्तन, कंप्यूटरीकरण तथा आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। NABARD एवं NCDC जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर PACS को अधिक प्रभावी और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में 150 से अधिक PACS प्रतिनिधियों एवं सहकारी कार्यकर्ताओं की भागीदारी वाला एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसने सहकारिता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।


सहकार भारती प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था नेतृत्व विकास, सहकारी प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता, सुशासन तथा ग्रामीण उद्यमिता जैसे विषयों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है। विशेष रूप से डेयरी सहकारी समितियाँ, मत्स्य सहकारी समितियाँ, शहरी सहकारी बैंकिंग, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) तथा ग्रामीण उद्यमों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक एवं प्रबंधकीय दक्षता पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि सहकारी संस्थाएँ आधुनिक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप कार्य कर सकें।


नीति निर्माण के क्षेत्र में भी सहकार भारती सक्रिय है। संस्था समय-समय पर भारत सरकार को सहकारिता क्षेत्र से संबंधित सुझाव एवं ज्ञापन प्रस्तुत करती रहती है। हाल ही में वित्त मंत्रालय को दिए गए ज्ञापन में PACS के लिए जमा बीमा, MUDRA ऋण सुविधा, सहकारी बैंकिंग को मजबूत करने, वित्तीय सुधार लागू करने तथा ग्रामीण ऋण व्यवस्था को सुदृढ़ करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। इन प्रयासों का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को अधिक स्थिर, सक्षम एवं वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है।


महिला सशक्तिकरण सहकार भारती की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। संस्था महिला सहकारी समितियों, SHG आधारित उद्यमों, ग्रामीण आजीविका गतिविधियों, खाद्य प्रसंस्करण समूहों तथा मोटा अनाज एवं हस्तशिल्प आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन दे रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन विपणन प्लेटफॉर्म, आदिवासी महिला उद्यमिता, कौशल विकास तथा मूल्य संवर्धित ग्रामीण उत्पादों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।


डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में सहकार भारती PACS कंप्यूटरीकरण, डिजिटल बहीखाता, ERP प्रणाली, डिजिटल प्रशासन तथा तकनीकी जागरूकता को बढ़ावा दे रही है। यह पहल सहकारिता मंत्रालय की राष्ट्रीय आधुनिकीकरण योजना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को पारदर्शी, दक्ष एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है।


संस्था विभिन्न क्षेत्र-विशेष सहकारिता गतिविधियों के माध्यम से डेयरी, मत्स्य पालन, बुनकर सहकारिता, सहकारी बैंकिंग, कृषि, जनजातीय आजीविका तथा ग्रामीण उद्यम जैसे क्षेत्रों में भी कार्य कर रही है। इसके अतिरिक्त सहकार भारती सतत कृषि एवं ग्रामीण समृद्धि से जुड़े राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी निभाती है।


युवा एवं नेतृत्व विकास के क्षेत्र में भी संस्था महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। युवाओं को सहकारिता आंदोलन से जोड़ने, सहकारी नेतृत्व विकसित करने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा स्टार्टअप आधारित सहकारी सोच को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।


सहकार भारती की अधिकांश गतिविधियाँ भारत सरकार की राष्ट्रीय सहकारिता पहलों के अनुरूप संचालित होती हैं। संस्था Ministry of Cooperation, National Cooperative Development Corporation (NCDC), National Bank for Agriculture and Rural Development (NABARD), PACS आधुनिकीकरण कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय सहकारिता नीति जैसी पहलों के साथ समन्वय बनाकर कार्य कर रही है। वर्तमान राष्ट्रीय सहकारिता आंदोलन का मुख्य फोकस बहुउद्देशीय PACS, डेयरी एवं मत्स्य सहकारिता, डिजिटलीकरण, सहकारी प्रशिक्षण तथा ग्रामीण सेवा वितरण को मजबूत बनाना है, और सहकार भारती इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दे रही है।



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